लोहड़ी की लख-लख बधाइयाँ। अलाव की गरमाहट आपके घर में सदा ख़ुशियाँ भरे। 🔥🙏
लोहड़ी 2027: तारीख, महत्व और शुभकामनाएँ
बुधवार, 13 जनवरी 2027 84 दिन बाकी
अलाव, रेवड़ी और नई फ़सल की ख़ुशी का पर्व।
लोहड़ी का महत्व
लोहड़ी मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और दिल्ली में मनाया जाने वाला सर्दियों का पर्व है। यह रबी की फ़सल, ख़ासकर गन्ने और गेहूँ की ख़ुशी और कड़ाके की सर्दी के ढलने का प्रतीक है।
शाम को लोग अलाव जलाकर उसके चारों ओर इकट्ठा होते हैं, आग में तिल, गुड़, रेवड़ी, मूँगफली और मक्के की खील डालते हैं और दुल्ला भट्टी के लोकगीत गाते हैं। ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्दा होता है।
परंपराएँ और पूजा
- शाम को लोहड़ी का अलाव जलाना
- आग में तिल, गुड़, रेवड़ी, मूँगफली और खील अर्पित करना
- लोकगीत गाना और भांगड़ा-गिद्दा करना
- नवजात शिशु या नवविवाहित जोड़े की पहली लोहड़ी का उत्सव
लोहड़ी की शुभकामनाएँ
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2027 में लोहड़ी कब है?
लोहड़ी बुधवार, 13 जनवरी 2027 को है, मकर संक्रांति से एक दिन पहले की शाम।
पहली लोहड़ी ख़ास क्यों होती है?
घर में नए बच्चे या नई बहू की पहली लोहड़ी बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। रिश्तेदारों को बुलाया जाता है और रेवड़ी, गजक और मिठाई बाँटी जाती है।